< السورة السابقة | فهرس السور | السورة التالية >



حدد حجم خط الآيات
()


بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلضُّحَىٰ ۝١

(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ۝٢

और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ۝۳

कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ۝٤

और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ۝٥

और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ۝٦

क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ۝۷

और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ۝۸

और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ۝۹

तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ۝١۰

माँगने वाले को झिड़की न देना

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ۝١١

और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना